ये न पूछो कि कौन सी दिल्ली

ये न पूछो कि कौन सी दिल्ली

ये न पूछो कि कौन सी दिल्ली
जो समझते हो, हाँ वही दिल्ली

दिल है, दरिया है और प्यासे भी
मीर ओ ग़ालिब की शायरी दिल्ली

यूँ तो आए गए कई ज़ालिम
बारहा लुट के फिर बसी दिल्ली

याद-ए-माज़ी की तंग गलियों में
कुछ पुरानी है, कुछ नई दिल्ली

चीख़ते चीख़ते अचानक यूँ
हाय! ख़ामोश हो गई दिल्ली

दो अलग मुल्क इक नहीं होंगे
दिल मेरा और आपकी दिल्ली।


Image: Jama Masjid, Delhi, watercolour, 1852
Image Source: Wikimedia Commons
Image in Public Domain


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समीर परिमल द्वारा भी