दर्द

दर्द

दर्द पिछले दरवाजे से आता है
और अगले दरवाजे़ से निकल जाता है
लेकिन कभी-कभी वह रुक जाता है
सुबह जाऊँगा, नहीं शाम जाऊँगा कहता
आज नहीं, कल जाऊँगा।
कभी कहता आज वार ठीक नहीं
आज उस दिशा में जाऊँगा तो लौट नहीं पाऊँगा।
इस तरह दर्द की मैं आवभगत करता
सुबह शाम उसको पंखा झुलाता दवा-दारू करता
उसकी पसंद-नापसंद का ख्याल रखता
ताकि जाएँ हँसी-खुशी और लौटे नहीं।
फिर भी वह अगले दरवाजे से जाता था
और पिछले दरवाजे से लौट आता था।


Image : Old Tramp
Image Source : WikiArt
Artist : Laszlo Mednyanszky
Image in Public Domain


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राजेन्द्र उपाध्याय द्वारा भी