गौर करो तो सुन पाओगे

गौर करो तो सुन पाओगे

गौर करो तो सुन पाओगे
परदे भी क्या कुछ कहते हैं

खिड़की से ये टुक-टुक देखें
नभ में उड़तीं कई पतंगें
अक्सर नीदों में आ जाते
सपने इनको रंग-बिरंगे
लेकिन इनको नहीं इजाजत
खुली हवा में लहराने की
बस छल्लों से बँधे-बँधे ही
ये परदे रोया करते हैं

घर के भीतर की सब बातें
राज बनाकर रखते परदे
धूप, हवा, बारिश की बूँदे
बुरी नजर भी सहते परदे
सन्नाटों में मकड़ी आकर
जाले यादों के बुन जाती
अवसादों की धूल हृदय पर
फिर भी ये हँसते रहते हैं

इन पर बने डिजाइन सुंदर
चमकीले कुछ फूल सुनहरे
परदे ढाँपें दर-दीवारें
और छिपाते दागी चेहरे
इन परदों ने लाँघी है कब
मर्यादा की लक्ष्मण रेखा
आँख देखतीं, कान सुन रहे
अधरों पर ताले रखते हैं।


Image : Balcony Room
Image Source : WikiArt
Artist : Adolph Menzel
Image in Public Domain

गरिमा सक्सेना द्वारा भी