कि आँखों में आँसू को मलना पड़ा था

कि आँखों में आँसू को मलना पड़ा था

कि आँखों में आँसू को मलना पड़ा था
उसे जब सँवर के निकलना पड़ा था

जमाने की वहशी नजर लग न जाए
जरूरत का दामन बदलना पड़ा था

झुका जो रहा सिर हमेशा अदब से
उसे ही अना को कुचलना पड़ा था

सुनी थी जहाँ उनके कदमों की आहट
वही राह मुझको भी चलना पड़ा था

नदी बन गया था तेरा प्यार जिसदिन
समुंदर था मैं भी मचलना पड़ा था।


Original Image: A Pond with three Cows and a Crescent Moon
Image Source: WikiArt
Artist: Camille Corot
Image in Public Domain
This is a Modified version of the Original Artwork


Notice: Undefined variable: value in /var/www/html/nayidhara.in/wp-content/themes/oceanwp-child/functions.php on line 154
अनिरुद्ध सिन्हा द्वारा भी