राह हमारी गुजर गयी है !

राह हमारी गुजर गयी है !

बहुत करीब तुम्हारे घर से
राह हमारी गुजर गयी है !
मेरे जीवन के कुछ भी क्षण
लगते कितने सूने तुम बिन
सुख के दिन मधुऋतु सुहावन
दुख के दिन जैसे हों सावन !
बहुत करीब तुम्हारे घर से
आह हमारी गुजर गयी है !
क्या जानें, तुम कैसे बदली
निष्ठुर हैं सुधियों के दंशन
आज विकल हैं आँसू मेरे
प्राण, प्राण में होती तड़पन
बहुत करीब तुम्हारे घर से
चाह हमारी गुजर गयी है !
तुम क्या जानो मेरे मन को
दुनिया की ही यह रीत रही
तुम नारी केवल श्रद्धा हो
सब कुछ हो लेकिन प्रीत नहीं
बहुत करीब तुम्हारे घर से
राह हमारी गुजर गयी है !


Image: The House in the Forest
Image Source: WikiArt
Artist: Camille Pissarro
Image in Public Domain