तुम आईं

तुम आईं

तुम आईं बज उठी हमारी
वंशी प्राणों के मृदु स्वर में!

तुम आईं सज उठी वसंती
सुषमा अकस्मात् ही घर में!

तुम आईं आ गई चाँदनी-सी
जैसे सुनसान निशा में!

तुम आईं छा गई स्वप्न की
स्वर्णाभा ज्यों दिशा-दिशा में!

तुम आईं छा गई प्राण-पादप पर
जैसे मृदु मर्मर-सी!


Image: Birdsong
Image Source: WikiArt
Artist: Karoly Ferenczy
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